प्रधानमंत्री आवास योजना ( ग्रामीण )

प्रधानमंत्री आवास योजना ( ग्रामीण )

प्रधानमंत्री आवास योजना ( ग्रामीण )

इस योजना का शुभारंभ 1 अप्रैल, 2016 को किया गया था।

लक्ष्य :

सभी बेघरों, कच्चे घर व टूटे-फूटे घरों में रहने वालों लोगों को 2022 तक पक्का आवास देना जिसमें सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हों।

चरण :

  • “सभी के लिए आवास” का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए 2021-22 तक विभिन्न चरणों में 2.95 करोड़ आवास बनाए जाएंगे।
  • पहले चरण के तहत 3 वर्षों में (2016-17 से 2018-19 तक) 1 करोड़ घर बनाए जाएंगे जबकि
  • दूसरे चरण के अन्तर्गत 3 वर्षों में (2019-20 से 20121-22) 1.95 करोड़ आवासों का निर्माण किया जाएगा।
  • पीएमएवाई – जी के तहत लाभार्थी को स्थानीय सामग्री, डिजाइन और प्रशिक्षित राजमिस्त्री से आवास निर्माण का अवसर दिया जाता है। मकानों को घर बनाने के लिए सम्मिलन के जरिए निवास-स्थान दृष्टिकोण अपनाने का प्रस्ताव दिया गया है।

 

उद्देश्य :

प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण वास्तव में इंदिरा आवास योजना का संशोधित रूप है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा लांच किया गया था. इस योजना का उद्देश्य भारत में ग्रामीण इलाकों में कच्चे और असुविधा युक्त घरो में रह रहें लोगों को तीन सालो 2016-2017 से 2018-2019 तक आधारभूत सुविधाओं से युक्त लगभग 1 करोड़ पक्के घर उपलब्ध कराना है.

घरों का आकार :

वर्तमान में इस योजना के तहत बनाए जाने वाले घरों का आकार 25 स्क्वेयर मीटर है, जिसे की पूर्व में निर्धारित घरों के आकार 20 स्क्वेयर मीटर से बढाकर निर्धारित किया गया है.

दी जाने वाली राशि :

इस योजना के तहत पहले मैदानी क्षेत्रोँ में 70,000 की राशि तय की गई थी जिसे वर्तमान में बढ़ाकर 1 लाख 20 हजार कर दिया गया है. वही इस योजना के तहत पहाड़ी इलाकों, मुश्किल क्षेत्रों में और आईएपी जिलों में पहले यह राशि 75,000 थी जिसे अब बढ़ाकर 1 लाख 30 हजार कर दिया गया है.

इस योजना में लगने वाला खर्चा केंद्र सरकार और राज्य सरकार के द्वारा मिलकर किया जायेगा . मैदानी क्षेत्रोँ में इस शेयर की जाने वाली राशि का अनुपात 60:40 होगा वहीं उत्तर-पूर्व और हिमालय वाले तीन राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह अनुपात 90:10 होगा.

इस योजना के तहत टॉयलेट के लिए 12000 रुपय की राशि का भुकतान स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण और उस एरिया में चलने वाले अन्य किसी सोर्स की तरफ से किया जायेगा.

इस योजना के तहत लाभार्थियों की पहचान और उनका सिलेक्शन उनके पास घर की कमी, एसईसीसी-2011 डाटा के अनुसार सोशल स्तर और ग्राम सभा के द्वारा वेरीफाई करने पर किया जायेगा.

इस योजना के तहत यदि लाभार्थी चाहे तो 70 हजार रुपय का लोन भी ले सकता है जो की उसे विभिन्न फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट से अप्लाई करके लेना होगा.

लाभार्थी को संपूर्ण सुविधा जैसे टॉयलेट, पीने का पानी, बिजली, सफाई खाना बनाने के लिए धुआ रहित ईंधन, सोशल और तरल अपशिष्टो से निपटने के लिए इस योजना को अन्य योजनाओं से जोड़ा भी गया है.

इस योजना के तहत दी जाने वाली संपूर्ण राशि का भुकतान लाभार्थी के बैंक एकाउंट में किया जायेगा. इसके लिए आवश्यक है की लाभार्थी का यह एकाउंट आधार कार्ड से लिंक हो.

इस योजना के तहत लाभार्थी का चयन (Identification and Selection of Beneficiaries, Eligibility Criteria) :

इस योजना के तहत लाभार्थी के चुनाव में सत्यता और पारदर्शिता सरकार का मुख्य उद्देश्य है. इसके अंतर्गत इस बात का ध्यान रखा जायेगा की इस योजना के तहत लाभ केवल उन लोगों को मिले जिसे इसकी सच में जरुरत है. इस योजना में लाभार्थियों का चयन करने के लिए एसईसीसी SECC (सोशिओ इकोनोमिक कास्ट सेन्सस) का उपयोग किया जायेगा जिसका सत्यापन ग्राम सभा द्वारा किया जायेगा.

इस योजना के तहत चयन निम्न बिन्दुओं के आधार पर किया जायेगा :

पात्र लाभार्थी :

इस योजना के तहत संपूर्ण भारत में कोई भी व्यक्ति जिसके पास स्वयं का घर नहीं है या जो कि 1, 2 या अधिक कमरों के कच्चे घर में रहता हो या जिसके घर में छत नहीं हो वह इस योजना के तहत लाभ ले सकता है. इस योजना का लाभ लेने के लिए यह आवश्यक नहीं है की लाभार्थी बीपीएल कार्ड होल्डर हो.

इस योजना के तहत निम्न व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी:

इस योजना के तहत प्रथम प्राथमिकता केटेगरी के अनुसार दी जाएगी, मतलब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, माइनॉरिटीज और अन्य वर्ग के लोग इस योजना के तहत लाभ के प्रथम दावेदार होंगे.

इन चयनित प्राथमिक लोगों में से भी उन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कि एसईसीसी में डिफाइन कंपल्सरी इनक्लूसन के क्राइटेरिया को पूर्ण करते है.

इस लिस्ट में दर्शाए सोसिओ इकनोमिक पैरामीटर SECC जिसके द्वारा प्राथमिकता (First Priority in PMAY) दी जाएगी निम्न है.

वह परिवार जिसमे कोई भी सदस्य एडल्ट मतलब 16 से 59 आयु वर्ष में मध्य ना हो वह इस योजना का प्रथम पात्र होगा.

वह परिवार जिसका मुखिया एक महिला हो और उसमे कोई भी एडल्ट मतलब 16 से 59 आयु वर्ष का सदस्य ना हो वह परिवार इस योजना के लिए प्रथम प्राथमिकता होंगे.

वह परिवार जिसका 25 वर्ष अधिक का कोई भी सदस्य पढ़ा लिखा ना हो वह परिवार इस योजना के लिए प्राथमिकता होंगे.

वह परिवार जिसका कोई सदस्य दिव्यांग हो और जिसमे कोई एडल्ट ना हो वह इस योजना के लिए प्राथमिकता होंगे

वह परिवार जिनके पास स्वयं की कोई जमीन उपलब्ध ना हो और जिनकी इनकम का अधिकतम भाग मजदूरी से आता हो वह इसके लिए प्राथमिकता होंगे.

घर का कंस्ट्रक्शन (Construction of House) :

#कंस्ट्रक्शन के लिए प्राप्त राशि :

 

 प्रधानमंत्री आवास योजना के द्वारा जो भी व्यक्ति लाभ लेना चाहते है उन्हें अपने घर के कंस्ट्रक्शन के लिए सरकार की तरफ से पैसे दिए जायेंगे. यह सहायता मैदानी इलाकों में 1 लाख 20 हजार की होगी वहीं डिफिकल्ट एरिया, आईएपी यूनिट्स और हिमालय के राज्यों में यह सहायता राशि बडाकर 1 लाख 30 हजार की गई है. इसका मुख्य उद्देश्य इन सभी एरिया में पक्का घर उपलब्ध करवाना है.

 

#पक्के घर से तात्पर्य :

 

यहाँ पक्के घर से सरकार का तात्पर्य ऐसे मकानों से है जो आने वाले 30 सालों तक घर में रहने वालों की रक्षा विभिन्न मौसम और परिस्थियों से निपटने में कर पाये. इसके अलावा इस घर में आधारभूत सुविधाए जैसे बिजली, पानी और वाश एरिया आदि होना भी आवश्यक है.

 

#घर की बनवाई :

 

इस योजना के तहत घर की बनवाई के लिए 90 से 95 दिन के लिए अनस्किल्ड लेबर मनरेगा की तरफ से दिये जाते है. अगर घर का मालिक चाहे और तो वह खुद भी अपने घर को बना सकता है और वह खुद अपने आप को मनरेगा के अंतर्गत 90 दिनों का वेतन पाने के लिए इनरोल करवा सकता है. अगर मालिक स्वयं इसे बनाने में सक्षम नहीं है तो उसे मनरेगा की तरफ से अनस्किल्ड मजदूर प्रदान किये जायेंगे. और यह बनवाई घर के लिए दिये जाने वाले 1 लाख 20 हजार में शामिल नहीं होगी.

 

#घर की बनवाई किसी कांट्रेक्टर के द्वारा नहीं की जाएगी :

 

 इस योजना के तहत यह नियम तय है की इसमे लाभार्थी को अपना घर स्वयं बनाना होगा . अगर इसमे किसी कांट्रेक्टर या एजेंट द्वारा कंस्ट्रक्शन पाया जाता है तो सरकार के पास इसे बिच में निरस्त करने का पुरा अधिकार होता है. यह घर किसी सरकारी विभाग या एजेंसी के द्वारा भी नहीं बनाया जा सकता इसमे केवल वही लोग भाग ले सकते है, जो की इस योजना के लिए ऑथोराइसड हो.

 

#स्वच्छ भारत अभियान :

 

 ग्रामीण क्षेत्रोँ में इन पक्के घरो में टॉयलेट को बनवाना जरुरी है, और अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए गाँवो में घरो के निर्माण के वक्त स्वच्छ भारत अभियान की तरफ से टॉयलेट निर्माण के लिए 12 हजार की राशि दी जाएगी.

 

#मकान का साइज़ :

 

इस योजना के अनुसार बनाए जाने वाले घरों का साइज भी निश्चित है. सरकार द्वारा यह साइज़ 25 स्वेयर मीटर तय किया गया है जिसमे कुकिंग और हाइजीनिक एरिया भी शामिल है.

 

👉किये जाने वाले कार्यो और मजदूरों की मेपिंग (Mapping of Field Function and Mason) :

 

  • इस योजना के तहत आपको घर बनाने के आर्डर मिलने से पहले बीडीओ या ब्लाक लेवल ऑफिसर जो की राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त होते है वह लाभार्थी का प्रधानमंत्री आवास योजना पर अपडेट किये हुए फोटो का सत्यापन करते है.

 

  • यह फोटो लाभार्थी द्वारा अपनी जगह के सामने जहाँ वह घर बनाना चाहता है वहाँ खड़े होकर लिया जाता है. अगर लाभार्थी पहले से बने हुए घर को पुनः ठीक करना चाहता है तो उसे यह बात भी एप के जरिये क्लियर करनी होगी.

 

  • अगर किसी परिस्थिति में लाभार्थी को जगह भी सरकार की तरफ से या अन्य किसी पब्लिक लैंड जैसे पंचायत की जमीन, कम्युनिटी की जगह या अन्य किसी लोकल अथॉरिटी के द्वारा प्रदान की जाती है, तो ऐसी जगह पर बिजली और पानी की सुविधा पहले से प्राप्त होना तय होता है.

 

  • सरकार ने यह पहले ही सुनिश्चित किया है कि वर्तमान वेट लिस्ट के फाइनल होने के बाद ऐसे लोगों की जरुरत पर भी ध्यान दिया जायेगा जिनके पास स्वयं की जगह उपलब्ध नहीं है.

 

👉लाभार्थी की लिस्ट जारी करना (Issue of Sanction Letter to Beneficiary) :

 

  • इस योजना के तहत अंतिम सूची एमआईएस-आवास सॉफ्टवेयर में रजिस्टर हुए आवेदको के नाम के आधार पर बनाई जाती है. इस योजना में रजिस्टर करते वक्त आवेदक को अपना नाम, बैंक एकाउंट डिटेल, आधार कार्ड नंबर और मनरेगा कार्ड नंबर रजिस्टर करना आवश्यक होता है. इसके अलावा आवेदक को अपना मोबाइल नंबर भी देना होता है.

 

  • रजिस्ट्रेशन के बाद आवेदक की डिटेल और बैंक एकाउंट का वेलिडेशन किया जाता है. इसके बाद प्रत्येक लाभार्थी के लिए सेनसेशन लेटर व्यक्तिगत रूप से बनाया जाता है और प्रत्येक के लिए एक अलग प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण आईडी और क्विक रेस्पोंसे कोड जनरेट किया जाता है.

 

  • इस योजना के तहत अलोटमेंट पति व पत्नी दोनों के सयुक्त नाम पर किया जाता है, परंतु अगर आवेदक कोई विधवा महिला, अविवाहित महिला या सेपरेट व्यक्ति हो तो यह जरुरी नहीं होता. इस स्थिति में स्टेट में केवल महिलाओं के नाम पर भी अलोटमेंट किये जातें है. अगर किसी स्थिति में यह आवेदन किसी दिव्यांग के नाम पर किया गया है तो यह अलोटमेंट भी केवल उस व्यक्ति के नाम पर ही किया जायेगा.

 

  • लाभार्थी को उसके चयन की जानकारी उसके द्वारा दिये गए मोबाइल नंबर पर एसएमएस करके प्रदान की जाती है.

 

  • लाभार्थी यह सेंसेशन आर्डर ब्लाक ऑफिस पर जाकर या अपनी प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण की आईडी का उपयोग करके इसकी ऑफिसियल वेबसाइट से भी निकाल सकता है.

 

  • लाभार्थी को सेंसेशन लेटर मिलने के बाद 12 महीनों में उसके द्वारा घर का निर्माण करना आवश्यक है. अगर इस प्रक्रिया में किसी तरह की देरी होती है तो यह प्रोजेक्ट में कोम्प्लिकेशन उत्पन्न करता है.

 

👉लाभार्थी को पैसे प्राप्त होना (Release Instalment to Beneficiary) :

 

इस योजना के तहत लाभार्थी को उसका पहला इंस्ट्रूमेंट सेक्शन लेटर इशू होने के 7 दिन के अंदर मिल जाता है. यह इंस्टोलमेंट लाभार्थी को उसके बैंक एकाउंट में डायरेक्ट ट्रांसफर किया जाता है. इसके बाद सरकार द्वारा उस बैंक से यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह यह जानकारी एसएमएस के द्वारा लाभार्थी को उसके मोबाइल में पंहुचाएगी.

फाइनेंसियल ईयर की शुरुआत में यह तय किया जाता है की लाभार्थी को कितने इन्स्टॉलमेंट में और कितने पैसे दिये जायेंगे. इसकी राशि कम से कम तीन इन्स्टॉलमेंट में दी जाती है और घर के कंस्ट्रक्शन की 7 स्टेज होती है.

  • घर के लिए मंजूरी मिलना (House Sanction)
  • आधार (Foundation)
  • नीव (Plinth)
  • खिड़की दरवाजें (Windowsill)
  • छत (Lintel)
  • पूरा घर बनकर तैयार (Completed)

 

घर के लिए पहली इंस्टालमेंट तो घर के लिए मंजूरी मिलते ही मिल जाती है परंतु दूसरी और तीसरी इंस्ट्रूमेंट के लिए घर के कंस्ट्रक्शन पर नजर रखी जाती है. और दूसरी इन्सटॉलमेंट फाउंडेशन और नीव के बनने के बाद मिलती है.

 

इसके बाद तीसरी और अंतिम इन्सटॉलमेंट के लिए चौथी, पाँचवी या छट्वी में से किसी भी स्टेज की मैपिंग करके पैसा लाभार्थी के एकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है.

 

👉इस योजना के तहत मिलने वाली कुल राशि (Total Amount for Beneficiary) :

 

  • इस योजना के तहत मैदानी क्षेत्रोँ में 1 लाख 20 हजार की राशि सरकार की तरफ से लाभार्थी को दी जाएगी, जो की एक सब्सिडी होगी.
  • इसके अलावा इसमे स्वच्छ भारत मिशन की तरफ से 12 हजार रुपय टॉयलेट के निर्माण के लिए दिये जायेंगे.
  • घर की बनाई के लिए 18 हजार रुपए की राशि मनरेगा की तरफ से मिलेगी. जो की लाभार्थी स्वयं भी 90 दिन मजदूरी करके प्राप्त कर सकता है.
  • इन सबके अलावा अगर लाभार्थी चाहे तो एक्स्ट्रा पैसो के लिए 70 हजार का लोन बैंक से ले सकता है. इसके लिए विभिन्न बैंक और फाइनेंसियल संस्थाओं में यह सुविधा उपलब्ध है.
  • इस योजना के तहत प्राप्त कुल राशि “2,20,000” = 1,20,000(PMAY-G) + 18000(MGNAREGA) + SBM-G (12,000)+ Loan (70,000)

 

👉प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का क्रियान्वयन

इस योजना के तहत सभी बेघर और जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले लोगों को पक्का मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में 81975 रुपये खर्च होंगे। यह प्रस्तावित किया गया है कि परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2018-19 के कालखंड में एक करोड़ घरों को पक्का बनाने के लिए मदद प्रदान की जाएगी। दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़ कर यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे भारत में क्रियान्वित की जाएगी। मकानों की क़ीमत केंद्र और राज्यों के बीच बांटी जाएगी।

 

👉विस्तृत जानकारी

 

क) प्रधानमंत्री आवास योजना की ग्रामीण आवास योजना- ग्रामीण का क्रियान्वयन।

 

ख) ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ आवासों के निर्माण के लिए 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में मदद प्रदान की जाएगी।

ग) समतल क्षेत्रों में प्रति एकक 1,20,000 तक एवं पहाड़ी क्षेत्रों में 1,30,000 तक सहायता में बढ़ोतरी।

घ) 21,975 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से की जाएगी।

ड.) लाभान्वितों की पहचान के लिए सामाजिक-आर्थिक-जातीय जनगणना- 2011 का उपयोग।

च) परियोजना के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहायता हेतु नेशनल टेकनिकल सपोर्ट एजेंसी का गठन।

👉क्रियान्वयन की रणनीति एवं लक्ष्यः

  • पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्ष्ता सुनिश्चित करते हुए लाभान्वितों की पहचान का कार्य सामाजिक-आर्थिक-जातीय जनगणना की सूचनाओं का प्रयोग कर किया जाएगा।
  • पूर्व में सहायता प्राप्त लाभान्वितों एवं अन्य कारणों से अयोग्य लोगों की पहचान के लिए सूची ग्राम सभा को दी जाएगी। अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
  • घरों के निर्माण की क़ीमत केंद्र एवं राज्य द्वारा समतल क्षेत्रों में 60:40 के अनुपात में तथा पहाड़ी/ उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों हेतु 90:10 के अनुपात में रखी जाएगी।
  • लाभान्वितों की वार्षिक सूची की पहचान ग्राम सभा द्वारा सहभागिता पूर्वक की जाएगी। मूल सूची की प्राथमिकता में परिवर्तन के लिए ग्राम सभा को लिखित में न्यायसंगत ठहराना होगा।
  • लाभान्वित के खाते में सीधे धनराशि स्थानांतरित की जाएगी।
  • फोटोग्राफ एप के माध्यम से अपलोड किए जाएंगे, भुगतान की प्रगति को लाभान्वित एप के माध्यम से देख पाएंगे।
  • लाभान्वित मनरेगा के अंतर्गत 90 दिनों के अकुशल श्रम का अधिकारी होगा, सर्वर से लिंक कर तकनीकी आधार पर इसको सुनिश्चित किया जाएगा।
  • मकानों की संरचना ऐसी होगी जो क्षेत्रीय आधार पर उपयुक्त हों, मकानों की रचना में ऐसी खासियतें रखी जाएंगी जो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से बचा सकें।
  • मिस्त्रियों की संख्या में कमी को देखते हुए उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।
  • मकान बनाने में प्रयुक्त सामग्री की अतिरिक्त ज़रूरत को देखते हुए ईंटों के निर्माण हेतु सीमेंट या फ्लाई एश का मनरेगा के अंतर्गत कार्य किया जाएगा।
  • लाभान्वित को 70,000 रुपए तक का ऋण लेने की सुविधा प्रदान की जाएगी।
  • मकान का क्षेत्रफल मौजूदा 20 वर्ग मीटर से बढ़ाकर भोजन बनाने के स्वच्छ स्थान समेत 25 वर्ग मीटर तक किया जाएगा।
  • परियोजना से जुड़े सभी लोगों के लिए गहन क्षमता सर्जक प्रक्रिया रखी जाएगी।
  • ज़िला एवं ब्लॉक स्तर पर आवासों के निर्माण हेतु तकनीकी सुविधाएं प्रदान करने के लिए मदद मुहैया कराई जाएगी।
  • आवासों के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एवं केंद्र और राज्य सरकारों को तकनीकी मदद देने के लिए एक नेशनल टेकनीकल सपोर्ट एजेंसी का गठन किया जाएगा।

 

मकान एक आर्थिक सम्पत्ति है एवं स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालने के साथ ही सामाजिक उन्नति में योगदान देता है। किसी परिवार के लिए रहने का स्थाई मकान होने के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष फायदे अमूल्य एवं ढेरों हैं।

 

निर्माण क्षेत्र भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता है। इस क्षेत्र का 250 से भी ज़्यादा अधीनस्थ उद्योगों से वास्ता है। ग्रामीण आवास योजना के विकास से ग्रामीण समाज में रोज़गारों का सृजन होता है और इससे गांवों के अर्थतंत्र का विकास होता है।

 

रहने के लिए वातावरण बेहतर होने के अप्रत्यक्ष फायदे श्रम उत्पादकता एवं स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव के रूप में होते हैं। पोषण, स्वच्छता, माता एवं बच्चे के स्वास्थ्य समेत मानव विकास के मापदण्डों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जीवन स्तर बेहतर होता है।

 


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