प्रधानमंत्री जन धन योजना

प्रधानमंत्री जन धन योजना

प्रधानमंत्री जन धन योजना ( Pradhan Mantri Jan Dhan Yojna – PMJDY )

भारत के प्रधानमंत्री ने 15 अगस्‍त 2014 को अपने प्रथम स्‍वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ नामक वित्‍तीय समावेश पर राष्‍ट्रीय मिशन की घोषणा की थी। एक पखवाड़े से कम समय में देश इस विशाल योजना को लागू करने के लिए तैयार हुआ और प्रधानमंत्री ने स्‍वयं नई दिल्‍ली में इस योजना की शुरूआत की। राज्‍यों की राजधानियों तथा सभी जिला मुख्‍यालयों में एक साथ समारोह आयोजित कर योजना प्रारंभ की गई।

पीएमजेडीवाई के अंतर्गत 6 स्तंभों के अंतर्गत व्यापक वित्तीय समावेशन का लक्ष्य हासिल करने का प्रस्ताव है।

प्रथम चरण (15 अगस्त, 2014-14 अगस्त, 2015) –

  1. बैंकिंग सुविधाओं तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करना।
  2. 6 महीने बाद रुपये 5000 की ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ बुनियादी बैंक खाते और एक लाख रुपये के अंतर्निहित दुर्घटना बीमा कवर के साथ रुपया डेबिट कार्ड और रुपया किसान कार्ड सुविधा प्रदान करना।
  3. वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम

द्वितीय चरण (15 अगस्त, 2015-15 अगस्त, 2018) –

  1. ओवर ड्राफ्ट खातों में चूक कवर करने के लिए क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना।
  2. सूक्ष्म बीमा
  3. स्वावलम्बन जैसी असंगठित क्षेत्र बीमा योजना।
  • इसके अतिरिक्त इस चरण में पर्वतीय, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को शामिल किया जाएगा। इतना ही नहीं, इस चरण में परिवार के शेष व्यस्क सदस्यों और विद्यार्थियों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • औसतन 3-4 गांवों के 1000-1500 परिवारों वाले देश के सभी ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों को सब-सर्विस एरिया (एसएसए) में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसमें पूर्वोत्तर/पर्वतीय राज्यों को छूट दी जाएगी।
  • यह प्रस्ताव है कि अगले 3 वर्षों में प्रत्येक केंद्र की व्यवहार्यता को देखते हुए 2000 से अधिक आबादी वाले 74000 गांवों को स्वावलम्बन अभियान के अंतर्गत व्यापार प्रतिनिधियों द्वारा कवर किया जाएगा और ऐसे केंद्रों को पूर्ण शाखाओं के रूप में परिवर्तित करने पर विचार किया जाएगा जहां 1+1 / 1+2 कर्मचारी काम कर रहे हों।
  • समूचे देश में सभी 6 लाख गांवों को सर्विस एरिया के साथ जोड़ा जाएगा, जिनमें प्रत्येक बैंक सब-सर्विस एरिया वाले 1000 से 1500 परिवारों की जरूरतें एक निश्चित बैंकिंग बिंदु से करेगा। यह प्रस्ताव है कि सब-सर्विस क्षेत्रों को बैंकिंग केंद्रों अर्थात् शाखा बैंकिंग और शाखा रहित बैंकिंग के जरिए कवर किया जाएगा। शाखा बैंकिंग का अर्थ है, ईंट गारे से बना परंपरागत शाखाएं। शाखा रहित बैंकिंग के अंतर्गत एक नियत बिंदु व्यापार प्रतिनिधि एजेंट की सेवाएं शामिल हैं जो बुनियादी बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए बैंक के प्रतिनिधि के रूप में काम करेगा।
  • योजना की कार्यान्वयन नीति यह है कि वर्तमान बैंकिंग ढांचे का उपयोग किया जाए और सभी परिवारों को कवर करने के लिए उसका विस्तार भी किया जाए। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में अब तक कवर न हुए परिवारों के बैंक खाते खोलने के लिए मौजूदा बैंकिंग नेटवर्क को भलीभांति तैयार किया जाएगा। विस्तार कार्य के अंतर्गत 50000 अतिरिक्त व्यापार प्रतिनिधियों की व्यवस्था, 7000 से अधिक शाखाओं और 20000 से अधिक नए एटीएम भी पहले चरण के दौरान स्थापित करने का प्रस्ताव है।
  • यह देखा गया था कि सुप्त खातों पर बैंकों की लागत अधिक आती है और लाभार्थियों को कोई लाभ नहीं होता। इस तरह बड़ी संख्या में खोले गए खातों के सुप्त पड़े रहने के पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए व्यापक योजना अनिवार्य है।
  • अतः नए कार्यक्रम में सभी सरकारी लाभों (केंद्र/राज्य/स्थानीय निकाय) को बैंकों के जरिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के तहत लाने का प्रस्ताव है। इसके अंतर्गत एलपीजी योजना में डीबीटी फिर शामिल की गयी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रायोजित महात्मा गांधी नरेगा कार्यक्रम को भी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना में शामिल किए जाने की संभावना है।
  • योजना के कार्यान्वयन में विभाग की सहायता के लिए एक परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता/समूह की सेवाएं ली जा रही हैं।
  • यह भी प्रस्ताव है कि कार्यक्रम को दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर और प्रत्येक राज्य की राजधानी तथा सभी जिला मुख्यालयों में एक साथ शुरू किया जा रहा है।
  • कार्यक्रम की प्रगति की रिपोर्टिंग/निगरानी के लिए एक वेब पोर्टल भी स्थापित किया जाएगा। विभिन्न पक्षों जैसे केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के विभागों, रिजर्व बैंक, नाबार्ड, एनपीसीआई और अन्य की भूमिकाओं को परिभाषित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों के व्यापार प्रतिनिधियों के रूप में ग्राम दल सेवकों की नियुक्ति का प्रस्ताव है।
  • दूर संचार विभाग से अनुरोध किया गया है कि वह कनेक्टिविटी कम होने या न होने की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे। उन्होंने सूचित किया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश के 5.93 लाख गांवों में से करीब 50000 दूर संचार सम्पर्क के अंतर्गत कवर नहीं किए गए हैं।

05 सितंबर 2018 को वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय मिशन –

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) को निम्नलिखित परिवर्तनों के साथ जारी रखने को मंजूरी दे दी है: 

  • वित्तीय समावेश के लिए राष्ट्रीय मिशन (पीएमजेडीवाई) 14 अगस्‍त, 2018 के बाद भी जारी रहेगा।
  • 5,000 रुपये की मौजूदा ओवर ड्राफ्ट (ओडी) सीमा बढ़ाकर 10,000 रुपये की गई।
  • 2,000 रुपये तक के ओवर ड्राफ्ट के लिए कोई शर्त नहीं होगी।
  • ओडी सुविधा का लाभ उठाने के लिए आयु सीमा संशोधित करके 18-60 साल के बजाय 18-65 साल की जाएगी।
  • ‘हर परिवार से लेकर हर वयस्क व्‍यक्ति’ तक की विस्तारित कवरेज के तहत 28 अगस्‍त 2018 के बाद खोले गए नए पीएमजेडीवाई खातों के अंतर्गत नए रुपे कार्ड धारकों के लिए दुर्घटना बीमा कवर को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जाएगा।

प्रभाव :

इस मिशन को जारी रखने के परिणामस्‍वरूप देश के सभी वयस्क व्‍यक्‍ति‍/परिवार अन्य वित्तीय सेवाओं एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने और 10,000 रुपये तक की ओवर ड्राफ्ट सुविधा के साथ कम से कम एक बुनियादी बैंक खाता खोलने में सक्षम हो जाएंगे। इससे उन्हें वित्तीय सेवाओं की मुख्यधारा में लाने के साथ-साथ सरकार की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं के लाभों को अधिक कुशलतापूर्वक हस्तांतरित करने में भी मदद मिलेगी।

पीएमजेडीवाई के तहत उपलब्धियां :

  • लगभग 32.41 करोड़ जन धन खातों को 81,200 करोड़ रुपये से भी अधिक की जमा राशि के साथ खोला गया है।
  • 53 प्रतिशत महिला जन धन खाता धारक और 59 प्रतिशत जन धन खाते ग्रामीण एवं अर्ध शहरी क्षेत्रों में हैं। 83 प्रतिशत से भी अधिक सक्रिय जन धन खातों (असम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर राज्यों को छोड़कर) को ‘आधार’ से जोड़ दिया गया है। इन खाता धारकों को लगभग 24.4 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए गए हैं।
  • 5 करोड़ से भी अधिक जन धन खातों में डीबीटी हो रहे हैं।
  • बैंकिंग कॉरस्‍पोंडेंट (बीसी) को 1.26 लाख उप सेवा क्षेत्रों (ग्रामीण क्षेत्र) में तैनात किया गया है जिनमें से प्रत्येक कॉरस्‍पोंडेंट 1000-1500 परिवारों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लगभग 13.16 करोड़ ‘आधार’ आधारित भुगतान प्रणाली (एईपीएस) लेन-देन जुलाई, 2018 के दौरान बीसी के जरिए किए गए हैं।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत 13.98 करोड़ सदस्‍य, अब तक 388.72 करोड़ रुपये की राशि वाले 19,436 दावों को निपटाया गया है।
  • इसी तरह, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के तहत 5.47 करोड़ सदस्‍य, अब तक 2206.28 करोड़ रुपये के 1.10 लाख दावों को निपटाया गया है।
  • 11 करोड़ लोग अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के सदस्य बन चुके हैं।

पीएमजेडीवाई के कार्यान्वयन के लिए एक पाइपलाइन बनाई गई है जिसके माध्यम से जन धन खातों और मोबाइल बैंकिंग को ‘आधार (जैम)’ से जोड़ दिया गया है। यह पाइपलाइन न केवल बचत, ऋण वितरण, सामाजिक सुरक्षा इत्यादि को सुविधाजनक बना रही है, बल्कि डीबीटी के माध्यम से देश के गरीब लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ का हस्‍तांतरण सुनिश्चित कर इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक कर रही है।

हर परिवार से लेकर हर वयस्क व्‍यक्‍ति‍’ तक का खाता खोलने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ प्रमुख वित्तीय समावेश कार्यक्रम (पीएमजेडीवाई) को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। जनधन-आधार-मोबाइल (जैम) की पाइपलाइन इन गतिविधियों की कवरेज के लिए आवश्यक व्‍यवस्‍था या सुविधाएं सुलभ कराएगी और इस तरह डिजिटलीकृत, वित्तीय दृष्टि से समावेशी और बीमित समाज बनाने की गति में तेजी लाएगी।

यह योजना क्‍या है और यह पहले की योजनाओं से कैसे भिन्‍न है?

  • ’प्रधानमंत्री धन जन योजना’ की परिकल्‍पना वित्‍तीय समावेश पर राष्‍ट्रीय मिशन के रूप में की गई है। इसका उद्देश्‍य देश के प्रत्‍येक परिवार को बैंकिंग सुविधा के दायरे में लाना और प्रत्‍येक परिवार के लिए बैंक खाता खोलना है।
  • वित्‍तीय समावेश यह समावेशी वित्‍त समाज के वंचित तथा निम्‍न आय वर्ग के लोगों वहन करने योग्‍य लागत पर वित्‍तीय सेवाएं देना है।
  • यह वित्‍तीय अलगाव की उस अवधारणा के उलट है जिसमें सेवा उपलब्‍ध नहीं होते यह सेवा वहन करने योग्‍य मूल्‍य पर नहीं मिलती।
  • यह कहा जाता है कि बैंकिंग सेवाओं का स्‍वभाव जन उत्‍पाद है पूरी आबादी को बिना किसी भेदभाव के बैंकिंग तथा भुगतान सेवाएं देना लोक नीति में वित्‍तीय समावेश का उद्देश्‍य है।
  • बैंक खाता होने से प्रत्‍येक परिवार की पहुंच बैंकिंग तथा ऋण सुविधा तक होती है इससे परिवार के लोग कर्जदारों के चंगुल से बाहर आते हैं, आपात स्‍थिति के कारण वित्‍तीय संकट को दूर रख पाते हैं और विभिन्‍न प्रकार के वित्‍तीय उत्‍पादों/लाभों का फल उठाते हैं।

देश में वित्‍तीय समावेश की वर्तमान स्थिति :

  • वित्‍तीय समावेश सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक/भारत सरकार ने अनेक प्रयास किये हैं। इनमें बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण, बैंक शाखा नेटवर्क का विस्‍तार, सहकारी तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्‍थापना और उनका विस्‍तार, पीएस उधारी व्‍यवस्‍था लागू करना, लीड बैंक योजना स्‍वयं सहायता समुह का गठन तथा राज्‍य विशेष दृष्टि से एसएलबीसी द्वारा सरकार प्रायोजित योजनाओं को विकसित करना शामिल है।
  • 2005-06 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को सलाह दी कि वे अपनी नीतियों को वित्‍तीय समावेश के उद्देश्‍य से जोड़े। अधिक वित्‍तीय समावेश सुनिश्चित करने के लिए तथा बैंकिग
  • पहुंच बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया गया कि ‘कारोबारी सहायक तथा कारोबारी प्रतिनिधि मॉडल‘ के जरिये वित्‍तीय तथा बैंकिंग सेवाएं उपलब्‍ध कराने में बिचौलियों के रूप में स्‍वयं सेवी संगठनों/स्‍वयं सहायता समूहों, एमएफआई तथा अन्‍य सिविल सोसायटी संगठनों की सेवाओं का उपयोग किया जाये।
  • लेकिन 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 24.67 करोड़ परिवारों में से 14.48 करोड़ परिवारों (58.7 प्रतिशत) वित्‍तीय सेवाएं मिलती हैं। 16.78 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 9.14 करोड़ (54.46 प्रतिशत) परिवार बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
  • 89 करोड़ शहरी परिवारों में से 5.34 करोड़ (67.68 प्रतिशत) परिवारों बैंकिंग सेवा मिल रही हैं। वर्ष 2011 में बैंकों ने 2000 से अधिक आबादी वाले (2001 की जनगणना के अनुसार) 74,351 गांवों को कारोबारी प्रतिनिधियों के जरिये स्‍वाभिमान अभियान के तहत कवर किया। लेकिन इस कार्यक्रम का सीमित प्रभाव पड़ा।

योजना की कार्यान्‍वयन नीति :-

  • वर्तमान बैंकिंग ढांचे का उपायोग करते हुए सभी परिवारों को कवर करते हुए इसका लाभ पहुंचाया जा सके।
  • ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में अब तक कवर नहीं हुए परिवारों के बैंक खाते खोलने के लिए वर्तमान बैंकिंग नेटवर्क को भलीभांति तैयार किया जाना है।
  • विस्‍तार कार्य के अंतर्गत 50000 अतिरिक्‍त व्‍यापार प्रतिनिधियों की व्‍यवस्‍था, 7000 से अधिक शाखाओं और 2000 अधिक नये एटीएम भी पहले चरण में स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव है।
  • पिछले अनुभवों के आधार पर देखा गया है कि सुप्‍त खातों पर बैंकों की लागत अधिक आती है और लाभार्थियों को कोई लाभ नहीं होता।
  • इस तरह बड़ी संख्‍या में खोले गए खातों के सुप्त पड़े रहने के पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए व्‍यापक योजना जरूरी है।
  • अतः नए कार्यक्रम में सभी सरकारी लाभों (केंद्र/राज्य/स्थानीय निकाय) को बैंकों के जरिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के तहत लाने का प्रस्ताव है।
  • इसके अंतर्गत एलपीजी योजना में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) फिर शामिल की जाएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रायोजित महात्मा गांधी नरेगा कार्यक्रम को भी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना में शामिल किए जाने की संभावना है।
  • योजना के कार्यान्वयन में विभाग की सहायता के लिए एक परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता/समूह की सेवाएं ली जा रही हैं।
  • कार्यक्रम को दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर और प्रत्येक राज्य की राजधानी तथा सभी जिला मुख्यालयों में एक साथ शुरू किया जा रहा है।
  • कार्यक्रम की प्रगति की रिपोर्टिंग/निगरानी के लिए एक वेब पोर्टल भी स्थापित किया गया है।
  • विभिन्न पक्षों जैसे केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के विभागों, रिजर्व बैंक, नाबार्ड, एनपीसीआई और अन्य की भूमिकाओं को परिभाषित किया गया है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों के व्यापार प्रतिनिधियों के रूप में ग्राम दल सेवकों की नियुक्ति का प्रस्ताव है। दूर संचार विभाग से अनुरोध किया गया है कि वह कनेक्टिविटी कम होने या न होने की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।
  • उन्होंने सूचित किया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश के 5.93 लाख गांवों में से करीब 50000 दूर संचार सम्पर्क के अंतर्गत कवर नहीं किए गए हैं।
  • सरकार के वित्‍तीय समावेशन के इस प्रयास में एक अलग बात यह है कि पहले जहां गांवों को लक्ष्‍य बनाकर योजना शुरू की जाती थी, वहीं इस बार प्रत्‍येक परिवार को लक्ष्‍य बनाया गया है।
  • पहले केवल ग्रामीण क्षेत्रों को लक्ष्‍य के रूप में लिया जाता था, लेकिन इस बार ग्रामीण और शहीरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया।
  • वर्तमान योजना में वित्‍त मंत्री की अध्‍यक्षता में निगरानी पर विशेष जोर देना और डिजिटल वित्‍तीय समावेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 41 के दिशा निर्देशक सिद्धांतों में कहा गया है कि सरकार अपनी आर्थिक क्षमता और विकास के मुताबिक रोज़गार और शिक्षा का अधिकार, बेरोज़गारी, वृद्धावस्था, बीमारी और विकलांगता के हालात में सहायता देने के लिए कारगर प्रावधान करे। चूंकि दिशा निर्देशक सिद्धांत सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होते इसलिए अब तक की सरकारें, नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा को दर किनार करती रहीं।

0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!